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09 March, 2010

त्रिपुटी


प्रेम, राग और द्वेस का, सूझे नाही उपाय
तीनों के गुण एक है,
मन में नाही समाय

- 'बेशुमार'

नारी


नारी के कई रूप है, कहीं माता कहीं दास

प्रेम सभी में एक सा, सब में तेरा बास

'बेशुमार'